Mar 8, 2015

Deleted by anuj
कलाकार बेच देगा अपनी कला कौड़ियों के भाव
तुम खरीद लेना उसे बिना कुछ चुकाए और ।
वो चित्रित करेगा तुम्हारे सभी घुमाव
गहराइयों को देकर रात के रक्तिम रंग 
और उभारों को सुर्ख मखमली उजास
तुम्हारे हर उम्फ को कैद कर लेगा केमरे में
करेगा तुम्हारी तसवीरों पर पच्चीकारी शब्दों की ।
वो लिखेगा ताउम्र बस प्रेम कवितायें, ताउम्र बुनेगा
वो इर्द गिर्द तुम्हारे अपने सभी उपन्यास
वो लिखेगा ये सब तुम्हारे आकर्षण से प्रेरित होकर
और वो कुछ नहीं करेगा सिवाय तुम्हें उभारने के ।
अगर तुम जीना चाहती हो कला के सुनहरेपन में
अपनी तय कर दी गयी नियति के विरुद्ध
तो तुम गलत नहीं कर रही हो अपने दिल के साथ
भले फिर वो बागीचे जिनको सौंपा गया है तुम्हें
सूख ही क्यों ना जाएँ , क्या अर्थ है आखिर
उस वृक्ष का जो तुम्हें ना दे सके प्राण वायु ।
मैं जानता हूँ कुछ गलत नहीं है जीना चाहना
बेशक गलतफहमी में , कुछ पलों के प्रेम में
किसी कलाकार की आह में बस जाने की चाह
कोई तरीका गलत तरीका नहीं है इस संसार में
वरना वो है ही क्यूँ , वो संभव ही क्यूँ है ।
और वैसे भी क्या है एक कलाकार ,
क्या होना है कुल जमा उसका
और कुल मिलाकर क्या चाहत होगी उसकी
तुम्हारी कोड़ियों में जितने स्वर्ग हैं वो वो
पूरी जिंदगी चुकाकर भी क्या कमा पाएगा ।
तो कलाकार बेच देगा अपनी कला कौड़ियों के भाव
तुम खरीद लेना उसे बिना कुछ चुकाए और ।
अ से

Mar 3, 2015

पवित्र!पवित्र!पवित्र!

पवित्र!पवित्र!पवित्र!पवित्र!पवित्र!पवित्र!पवित्र!पवित्र!
पवित्र!पवित्र!पवित्र!पवित्र!पवित्र!पवित्र!पवित्र!
ये संसार है पवित्र! ये आत्मा है पवित्र! ये चमड़ी है पवित्र!
ये नाक है पवित्र! ये जीभ और शिश्न और हाथ
और गुदाद्वार है पवित्र!
सब कुछ है पवित्र! हर कोई है पवित्र! हर जगह है पवित्र!
हर दिन है शाश्वत ! हर इंसान है फरिश्ता !
ये नितंब उतने ही पवित्र जितने फरिश्ते ! ये पागल उतना ही पवित्र
जितना तुम मेरी आत्मा हो पवित्र !
ये टंकणक है पवित्र ये कविता है पवित्र ये ध्वनि है पवित्र
ये श्रोता हैं पवित्र ये उत्साह है पवित्र !
पवित्र पीटर पवित्र एलन पवित्र सोलम पवित्र लूसियन
पवित्र केरौस पवित्र हंके पवित्र बरोज़ पवित्र केसेडी !
पवित्र वो अंजान परेशान और सताया भिखारी
पवित्र वो घिनौना मानसी फरिश्ता !
पवित्र वो मेरी माँ विक्षिप्त पगलखाने में !
पवित्र वो लिंग वो कान्सास के दादुओं का !
पवित्र वो सेक्सोफोन की कराह ! पवित्र वो कयामत के कोड़े !
पवित्र वो जैजबैंड मारिजुआना
हिप्पीयों का सुकून और कबाड़ और ड्रम !
पवित्र वो एकांत ऊँची छतें और तहखाने !
पवित्र वो रेस्त्रां लाखों की भीड़ थामे !
पवित्र वो रहस्यमय नदी आँसुओं की
रहती है जो रास्तों की नीचे से बहती ।
पवित्र वो अकेला विशाल रथ !
पवित्र वो व्यापक भेड़ें मध्यम वर्ग की !
पवित्र वो सनकी चरवाहे विद्रोह के
जो खोद गए लॉस एनजेल्स !
पवित्र लॉस एंजेल्स पवित्र न्यू यॉर्क पवित्र
सेन फ्रेंसिस्को पवित्र प्योरिया और सिएटल
पवित्र पेरिस पवित्र टेंजीयर पवित्र मॉस्को
पवित्र ईस्तांबुल पवित्र !
पवित्र समय अनंतता में पवित्र अनंतता समय में
पवित्र वो अन्तरिक्ष की घड़ियाँ पवित्र वो चौथी विमा
पवित्र वो पाँचवाँ अंतर्राष्ट्रीय पवित्र वो फरिश्ता मोलोक में !
पवित्र ये सागर पवित्र ये मरुस्थल पवित्र ये रेल की पटरी
पवित्र ये चलवाहन पवित्र ये दृष्टि पवित्र ये दृष्टिभ्रम
पवित्र ये चमत्कार पवित्र ये पुतलियाँ पवित्र रसातल !
पवित्र क्षमा ! दया ! दान ! विश्वास ! पवित्र ! हमारे ! शरीर !
पीड़ा ! उदारता ! पवित्र !
पवित्र ये अलौकिक उत्कृष्ठ अतिरिक्त बोधमय
कृपा आत्मा की !

I carry your heart with me ( i carry it in my heart ) -- E.E.Cummins

मैं रखता हूँ दिल तुम्हारा साथ अपने ( मैं रखता हूँ इसे अपने दिल में )
मैं नहीं होता इसके बिना कभी ( कहीं भी जाऊँ मैं, जाती हो तुम, ओ प्रिय
और जो कुछ भी होता है हाथों मेरे , होता है वो किया तुम्हारा, मेरी प्रिये ) ।
मैं डरता हूँ नहीं किसी नियति से ( कि तुम हो मेरी नियति , मेरी मिष्ठी ) 
मैं चाहता हूँ नहीं कोई दुनिया ( कितनी सुंदर हो तुम मेरी दुनिया , मेरी खरी )
और ये तुम हो जो कुछ कभी अर्थ रहा है चाँद का
और जो कुछ हमेशा से सूरज गाता है तुम हो ।
ये है वो रहस्य गहरा , नहीं कोई जानता
( ये है जड़ की जड़ और कोंपल कोंपल की
और आकाश का भी आकाश उस वृक्ष का
जीवन कहलाता है जो , जाता है उसके आगे जो
उम्मीद कर सकती है आत्मा या छुपा सकता है मन )
और ये है वो आश्चर्य जो रखता है तारों को पृथक ।
मैं साथ रखता हूँ दिल तुम्हारा ( मैं रखता हूँ इसे अपने दिल में ) ।
Transalted from
I carry your heart with me ( i carry it in my heart ) -- E.E.Cummins

Mar 2, 2015

पहाड़ कहते हैं पेड़ों से


पहाड़ कहते हैं पेड़ों से
लचीले बनो
जरा सा झुक जाओ
पेड़ हैं कि सुनते ही नहीं ।
कितने जड़ हैं पहाड़
निरर्थकता में सीना ताने खड़े हैं
बहुत ऊंचे हैं अपनी जड़ता में ।
जड़ में जड़ जमाये हैं पेड़
तन का आकार नहीं
ध्वजा की ऊँचाई लिए
वस्त्र सा सम्मान बने ।
पहाड़ कुछ ना कुछ बोलते रहते हैं
पेड़ हैं कि लहराते हैं सुनते हुये ।
अ से

I do not love you --- Pablo Neruda

प्यार करता नहीं हूँ मैं तुमसे पर मुझे प्यार है तुमसे
और प्यार करता हूँ पर प्यार मिलने के लिए नहीं
तब भी इंतज़ार करता हूँ जब मुझे उम्मीद ना हो
शांत जलने लगता है दिल मेरा
मुझे तुमसे प्यार है सिर्फ इसलिए कि मुझे तुमसे प्यार है
मुझे नफरत है तुमसे बेइंतेहा मुझे इस बेबसी से नफरत है
और तुम्हारे लिए मेरे प्रेम के बदलाव का पैमाना
तुम्हें देखना नहीं है बल्कि आँखें बंद करके प्रेम करना है
जबकि शायद जनवरी की रौशनी जला देगी
इसकी निर्मम किरणों से मेरे दिल को
चुराकर मेरी चाभी सच्ची शांति की राह की
पर इस कहानी में सिर्फ मैं हूँ जिसे मरना है
और मैं मरूँगा इस प्यार से कि मुझे प्यार है तुमसे
कि मुझे प्यार है तुमसे , प्रिय , रक्त में और रौशनी में ।
translated from --- I do not love you --- Pablo Neruda

Mar 1, 2015

अब ये बरसात मुझे नहीं भिगोती



अब ये बरसात मुझे नहीं भिगोती
अब
फेंके हुये पत्थर मुझे चोट नहीं पहुंचाते
अब
साधे हुये व्यंग्य बाण मुझे नहीं भेद पाते 
अब
दौड़ती हुयी दुनिया मुझे पीछे नहीं छोड़ पाती
अब
बहुत शांति है मेरे स्वप्नों में
अब
कुछ भी शेष नहीं ।
कोई भी शोर नहीं ।
सुकून है
एक रात का ।
एक शाश्वत रात का सुकून ।
अ से