Oct 19, 2013

" अर्द्धनारीश्वर "



इन्द्र धनुषी छटाओं ,
पुष्प शोभाओं ,
स्वच्छ कल कल धाराओं ,
मंद स्वच्छंद हवाओं
सरगमी नादिकाओं ,
सी विस्तारित असीमित
धवल उज्जवल अर्द्ध .... शिवप्रिया ,
और
फैली दिशाओं ,
चेतन ध्वजाओं ,
सदा स्फूर्त ,
स्व नादित ध्वनिकाओं
समान स्थिर असीमित
श्वेत कर्पूरी प्रकाश ....परार्ध शिव
को
नमन है ,  नमन है ॥

कर्म प्रवृत्ति ,
इच्छा शक्ति ,
गुणों और भावों की
अभिव्यक्तन आसक्ति ,
पवित्र कस्तूरी गंध
लाल - नारंगी आकाश पटल .... शिवा ,
और
कर्म निवृत्ति ,
संतुष्टि , तृप्ति ,
तीनो गुणों की
परार्थ शक्ति ,
भस्म सी विरक्ति
अद्भुत भक्ति .... शिव
को
नमन है ,  नमन है ॥

स्वर्ण शोभित दृश्य आभा ,
रजत संचित रत्न प्रभा ,
खनक देते दिव्याभूषण
चित्त वेदित जिजीविषा ... पार्वती ,
और
रत्न दिगम्बर ,
सत्य सुन्दर ,
सर्प भूषित ,
वेद अविदित ,
चित्त निवेदित
सामर्थ्य कुशा ... शिव
को
नमन है ,  नमन है ॥

प्रसन्न कमल सी ,
श्रद्धाजल संस्कृत ,
जीवन ज्योतित ,
विश्वास आपूरित ,
पूर्ण विस्तृत ,
निस्संदेह दृष्टि
द्वि चक्षु ... शैलपुत्री ,
और
सम्यक नयन ,
समदृष्टि ,
ज्ञान दृष्टि ,
शांत ,  सौम्य ,
त्रिनेत्र ..... शिव
को
नमन है ,  नमन है ॥


फल - पुष्प सज्जित ,
लता - वृक्ष शोभित ,
जगत - जीव ज्योति ,
दिव्य - अम्बरा ...... शिवा ,
और
वज्र सघन ,
स्फटिक प्रकाश ,
कपाल - माल सज्जित ,
दिक् - अम्बर ...... शिव
को
नमन है ,  नमन है ॥


जलापूरित मेघ ,
वेगमान सरिता ,
तरंगित वाणी ,
सर्वथा स्वतंत्र प्रकृति ..... शिवा ,
और
तड़ित प्रचंड ,
तेजोमय दंड ,
स्थिर नाद ,
दिक-लोक स्वामी .... शिव
को
नमन है ,  नमन है ॥

जगत सृजक ,
विश्वप्रपंच कर्ता ,
नाट्य नृतक ,
जगज्जननी ,
स्वभाव पूषा .... शिवप्रिया ,
और
जगत संहारक ,
आत्मस्थ कर्ता ,
तांडव नृतक ,
भूतभाव पूषण ... पार्वती प्रिय ,
को
नमन है ,  नमन है ॥

जिनकी दिव्य चमक से
सम्पूर्ण व्योम प्रकाशित है ,
जिनकी शक्तियों से ,
सम्पूर्ण सृष्टि अच्छादित है ,
जिनके तेज से
समस्त दिशायें कम्पित हैं ,
उन सर्व इष्ट देने वाली शिवसंयुक्ता और
आयु और भोग देने वाले पार्वतीयुक्त ,
अर्द्धनारीश्वर को नमन है ,
जो अनंत और वर्तमान सभी काल में
सृष्टि स्थिति और लय कर्ता हैं ,
उनको अनेक बार नमन है ॥

................................................................. अ से

5 comments:

दर्पण साह said...

कमाल !

Unknown said...

Poetry with some indian spices....ki lajawaab aur behtarin rachna...:)

kuldeep thakur said...

सुंदर प्रस्तुति...
दिनांक 01/09/2014 की नयी पुरानी हलचल पर आप की रचना भी लिंक की गयी है...
हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...
हलचल में शामिल की गयी सभी रचनाओं पर अपनी प्रतिकृयाएं दें...
सादर...
कुलदीप ठाकुर

Unknown said...

भारतीयता की खुशबू से ओतप्रोत प्रस्तुति

कालीपद "प्रसाद" said...

अर्धनारीश्वर की सुन्दर वन्दना !
गणपति वन्दना (चोका )
हमारे रक्षक हैं पेड़ !