क्रिया और कर्म -- 2
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कोई भी क्रिया भूसे के ढेर में से सुई ढूँढना भर है ,
और कर्म सुई मिल जाने के बाद क्रिया त्याग देना !!
क्रिया किसी कारण से आरंभ होती है ... पर उसे जारी रहने के लिए कारण आवश्यक नहीं ...
.... वो प्रमाद में भी बदल सकती है ,
पर कर्म सीधा अतीत से , अपने मूल कारण से जुड़ा रहता है .... और पूर्णता पर उसी में लय हो जाता है !!
.............................................. अ-से अनुज ॥
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कोई भी क्रिया भूसे के ढेर में से सुई ढूँढना भर है ,
और कर्म सुई मिल जाने के बाद क्रिया त्याग देना !!
क्रिया किसी कारण से आरंभ होती है ... पर उसे जारी रहने के लिए कारण आवश्यक नहीं ...
.... वो प्रमाद में भी बदल सकती है ,
पर कर्म सीधा अतीत से , अपने मूल कारण से जुड़ा रहता है .... और पूर्णता पर उसी में लय हो जाता है !!
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