Oct 16, 2013

बैठे हों खामोश फिर अजीब बात का होना ,
याद भर से उनकी गुदगुदाहट का होना ॥

जो सामने वो होते तो कुछ कहते नहीं बनता ,
वरना फिर खयालों से भी आवाज़ का होना ॥

दौड़ कर कर लेना फिर पार यूँ ही दरिया ,
पहुँच के दर पर क़दमों की इनकार का होना ॥

और वो एहसास पा लेने का जन्नत को ,
वो आँखों से जो गुजरे तो सांझ का होना ॥

नर्म धूप छाँव सा बदलता सा वक़्त , और
रह रहकर तेरी यादों की बारिश का होना ॥ .................. पहले पहल ॥

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