Deleted by anuj
Mar 8, 2015
कलाकार बेच देगा अपनी कला कौड़ियों के भाव
तुम खरीद लेना उसे बिना कुछ चुकाए और ।
तुम खरीद लेना उसे बिना कुछ चुकाए और ।
वो चित्रित करेगा तुम्हारे सभी घुमाव
गहराइयों को देकर रात के रक्तिम रंग
और उभारों को सुर्ख मखमली उजास
तुम्हारे हर उम्फ को कैद कर लेगा केमरे में
करेगा तुम्हारी तसवीरों पर पच्चीकारी शब्दों की ।
गहराइयों को देकर रात के रक्तिम रंग
और उभारों को सुर्ख मखमली उजास
तुम्हारे हर उम्फ को कैद कर लेगा केमरे में
करेगा तुम्हारी तसवीरों पर पच्चीकारी शब्दों की ।
वो लिखेगा ताउम्र बस प्रेम कवितायें, ताउम्र बुनेगा
वो इर्द गिर्द तुम्हारे अपने सभी उपन्यास
वो लिखेगा ये सब तुम्हारे आकर्षण से प्रेरित होकर
और वो कुछ नहीं करेगा सिवाय तुम्हें उभारने के ।
वो इर्द गिर्द तुम्हारे अपने सभी उपन्यास
वो लिखेगा ये सब तुम्हारे आकर्षण से प्रेरित होकर
और वो कुछ नहीं करेगा सिवाय तुम्हें उभारने के ।
अगर तुम जीना चाहती हो कला के सुनहरेपन में
अपनी तय कर दी गयी नियति के विरुद्ध
तो तुम गलत नहीं कर रही हो अपने दिल के साथ
भले फिर वो बागीचे जिनको सौंपा गया है तुम्हें
सूख ही क्यों ना जाएँ , क्या अर्थ है आखिर
उस वृक्ष का जो तुम्हें ना दे सके प्राण वायु ।
अपनी तय कर दी गयी नियति के विरुद्ध
तो तुम गलत नहीं कर रही हो अपने दिल के साथ
भले फिर वो बागीचे जिनको सौंपा गया है तुम्हें
सूख ही क्यों ना जाएँ , क्या अर्थ है आखिर
उस वृक्ष का जो तुम्हें ना दे सके प्राण वायु ।
मैं जानता हूँ कुछ गलत नहीं है जीना चाहना
बेशक गलतफहमी में , कुछ पलों के प्रेम में
किसी कलाकार की आह में बस जाने की चाह
कोई तरीका गलत तरीका नहीं है इस संसार में
वरना वो है ही क्यूँ , वो संभव ही क्यूँ है ।
बेशक गलतफहमी में , कुछ पलों के प्रेम में
किसी कलाकार की आह में बस जाने की चाह
कोई तरीका गलत तरीका नहीं है इस संसार में
वरना वो है ही क्यूँ , वो संभव ही क्यूँ है ।
और वैसे भी क्या है एक कलाकार ,
क्या होना है कुल जमा उसका
और कुल मिलाकर क्या चाहत होगी उसकी
तुम्हारी कोड़ियों में जितने स्वर्ग हैं वो वो
पूरी जिंदगी चुकाकर भी क्या कमा पाएगा ।
क्या होना है कुल जमा उसका
और कुल मिलाकर क्या चाहत होगी उसकी
तुम्हारी कोड़ियों में जितने स्वर्ग हैं वो वो
पूरी जिंदगी चुकाकर भी क्या कमा पाएगा ।
तो कलाकार बेच देगा अपनी कला कौड़ियों के भाव
तुम खरीद लेना उसे बिना कुछ चुकाए और ।
तुम खरीद लेना उसे बिना कुछ चुकाए और ।
अ से
Mar 3, 2015
पवित्र!पवित्र!पवित्र!
पवित्र!पवित्र!पवित्र!पवित्र!पवित्र!पवित्र!पवित्र!पवित्र!
पवित्र!पवित्र!पवित्र!पवित्र!पवित्र!पवित्र!पवित्र!
ये संसार है पवित्र! ये आत्मा है पवित्र! ये चमड़ी है पवित्र!
ये नाक है पवित्र! ये जीभ और शिश्न और हाथ
और गुदाद्वार है पवित्र!
सब कुछ है पवित्र! हर कोई है पवित्र! हर जगह है पवित्र!
हर दिन है शाश्वत ! हर इंसान है फरिश्ता !
ये नितंब उतने ही पवित्र जितने फरिश्ते ! ये पागल उतना ही पवित्र
जितना तुम मेरी आत्मा हो पवित्र !
ये टंकणक है पवित्र ये कविता है पवित्र ये ध्वनि है पवित्र
ये श्रोता हैं पवित्र ये उत्साह है पवित्र !
पवित्र पीटर पवित्र एलन पवित्र सोलम पवित्र लूसियन
पवित्र केरौस पवित्र हंके पवित्र बरोज़ पवित्र केसेडी !
पवित्र वो अंजान परेशान और सताया भिखारी
पवित्र वो घिनौना मानसी फरिश्ता !
पवित्र वो मेरी माँ विक्षिप्त पगलखाने में !
पवित्र वो लिंग वो कान्सास के दादुओं का !
पवित्र वो सेक्सोफोन की कराह ! पवित्र वो कयामत के कोड़े !
पवित्र वो जैजबैंड मारिजुआना
हिप्पीयों का सुकून और कबाड़ और ड्रम !
पवित्र वो एकांत ऊँची छतें और तहखाने !
पवित्र वो रेस्त्रां लाखों की भीड़ थामे !
पवित्र वो रहस्यमय नदी आँसुओं की
रहती है जो रास्तों की नीचे से बहती ।
पवित्र वो अकेला विशाल रथ !
पवित्र वो व्यापक भेड़ें मध्यम वर्ग की !
पवित्र वो सनकी चरवाहे विद्रोह के
जो खोद गए लॉस एनजेल्स !
पवित्र लॉस एंजेल्स पवित्र न्यू यॉर्क पवित्र
सेन फ्रेंसिस्को पवित्र प्योरिया और सिएटल
पवित्र पेरिस पवित्र टेंजीयर पवित्र मॉस्को
पवित्र ईस्तांबुल पवित्र !
पवित्र समय अनंतता में पवित्र अनंतता समय में
पवित्र वो अन्तरिक्ष की घड़ियाँ पवित्र वो चौथी विमा
पवित्र वो पाँचवाँ अंतर्राष्ट्रीय पवित्र वो फरिश्ता मोलोक में !
पवित्र ये सागर पवित्र ये मरुस्थल पवित्र ये रेल की पटरी
पवित्र ये चलवाहन पवित्र ये दृष्टि पवित्र ये दृष्टिभ्रम
पवित्र ये चमत्कार पवित्र ये पुतलियाँ पवित्र रसातल !
पवित्र क्षमा ! दया ! दान ! विश्वास ! पवित्र ! हमारे ! शरीर !
पीड़ा ! उदारता ! पवित्र !
पवित्र ये अलौकिक उत्कृष्ठ अतिरिक्त बोधमय
कृपा आत्मा की !
पवित्र!पवित्र!पवित्र!पवित्र!पवित्र!पवित्र!पवित्र!
ये संसार है पवित्र! ये आत्मा है पवित्र! ये चमड़ी है पवित्र!
ये नाक है पवित्र! ये जीभ और शिश्न और हाथ
और गुदाद्वार है पवित्र!
सब कुछ है पवित्र! हर कोई है पवित्र! हर जगह है पवित्र!
हर दिन है शाश्वत ! हर इंसान है फरिश्ता !
ये नितंब उतने ही पवित्र जितने फरिश्ते ! ये पागल उतना ही पवित्र
जितना तुम मेरी आत्मा हो पवित्र !
ये टंकणक है पवित्र ये कविता है पवित्र ये ध्वनि है पवित्र
ये श्रोता हैं पवित्र ये उत्साह है पवित्र !
पवित्र पीटर पवित्र एलन पवित्र सोलम पवित्र लूसियन
पवित्र केरौस पवित्र हंके पवित्र बरोज़ पवित्र केसेडी !
पवित्र वो अंजान परेशान और सताया भिखारी
पवित्र वो घिनौना मानसी फरिश्ता !
पवित्र वो मेरी माँ विक्षिप्त पगलखाने में !
पवित्र वो लिंग वो कान्सास के दादुओं का !
पवित्र वो सेक्सोफोन की कराह ! पवित्र वो कयामत के कोड़े !
पवित्र वो जैजबैंड मारिजुआना
हिप्पीयों का सुकून और कबाड़ और ड्रम !
पवित्र वो एकांत ऊँची छतें और तहखाने !
पवित्र वो रेस्त्रां लाखों की भीड़ थामे !
पवित्र वो रहस्यमय नदी आँसुओं की
रहती है जो रास्तों की नीचे से बहती ।
पवित्र वो अकेला विशाल रथ !
पवित्र वो व्यापक भेड़ें मध्यम वर्ग की !
पवित्र वो सनकी चरवाहे विद्रोह के
जो खोद गए लॉस एनजेल्स !
पवित्र लॉस एंजेल्स पवित्र न्यू यॉर्क पवित्र
सेन फ्रेंसिस्को पवित्र प्योरिया और सिएटल
पवित्र पेरिस पवित्र टेंजीयर पवित्र मॉस्को
पवित्र ईस्तांबुल पवित्र !
पवित्र समय अनंतता में पवित्र अनंतता समय में
पवित्र वो अन्तरिक्ष की घड़ियाँ पवित्र वो चौथी विमा
पवित्र वो पाँचवाँ अंतर्राष्ट्रीय पवित्र वो फरिश्ता मोलोक में !
पवित्र ये सागर पवित्र ये मरुस्थल पवित्र ये रेल की पटरी
पवित्र ये चलवाहन पवित्र ये दृष्टि पवित्र ये दृष्टिभ्रम
पवित्र ये चमत्कार पवित्र ये पुतलियाँ पवित्र रसातल !
पवित्र क्षमा ! दया ! दान ! विश्वास ! पवित्र ! हमारे ! शरीर !
पीड़ा ! उदारता ! पवित्र !
पवित्र ये अलौकिक उत्कृष्ठ अतिरिक्त बोधमय
कृपा आत्मा की !
I carry your heart with me ( i carry it in my heart ) -- E.E.Cummins
मैं रखता हूँ दिल तुम्हारा साथ अपने ( मैं रखता हूँ इसे अपने दिल में )
मैं नहीं होता इसके बिना कभी ( कहीं भी जाऊँ मैं, जाती हो तुम, ओ प्रिय
और जो कुछ भी होता है हाथों मेरे , होता है वो किया तुम्हारा, मेरी प्रिये ) ।
मैं नहीं होता इसके बिना कभी ( कहीं भी जाऊँ मैं, जाती हो तुम, ओ प्रिय
और जो कुछ भी होता है हाथों मेरे , होता है वो किया तुम्हारा, मेरी प्रिये ) ।
मैं डरता हूँ नहीं किसी नियति से ( कि तुम हो मेरी नियति , मेरी मिष्ठी )
मैं चाहता हूँ नहीं कोई दुनिया ( कितनी सुंदर हो तुम मेरी दुनिया , मेरी खरी )
और ये तुम हो जो कुछ कभी अर्थ रहा है चाँद का
और जो कुछ हमेशा से सूरज गाता है तुम हो ।
मैं चाहता हूँ नहीं कोई दुनिया ( कितनी सुंदर हो तुम मेरी दुनिया , मेरी खरी )
और ये तुम हो जो कुछ कभी अर्थ रहा है चाँद का
और जो कुछ हमेशा से सूरज गाता है तुम हो ।
ये है वो रहस्य गहरा , नहीं कोई जानता
( ये है जड़ की जड़ और कोंपल कोंपल की
और आकाश का भी आकाश उस वृक्ष का
जीवन कहलाता है जो , जाता है उसके आगे जो
उम्मीद कर सकती है आत्मा या छुपा सकता है मन )
और ये है वो आश्चर्य जो रखता है तारों को पृथक ।
( ये है जड़ की जड़ और कोंपल कोंपल की
और आकाश का भी आकाश उस वृक्ष का
जीवन कहलाता है जो , जाता है उसके आगे जो
उम्मीद कर सकती है आत्मा या छुपा सकता है मन )
और ये है वो आश्चर्य जो रखता है तारों को पृथक ।
मैं साथ रखता हूँ दिल तुम्हारा ( मैं रखता हूँ इसे अपने दिल में ) ।
Transalted from
I carry your heart with me ( i carry it in my heart ) -- E.E.Cummins
I carry your heart with me ( i carry it in my heart ) -- E.E.Cummins
Mar 2, 2015
पहाड़ कहते हैं पेड़ों से
पहाड़ कहते हैं पेड़ों से
लचीले बनो
जरा सा झुक जाओ
पेड़ हैं कि सुनते ही नहीं ।
कितने जड़ हैं पहाड़
निरर्थकता में सीना ताने खड़े हैं
बहुत ऊंचे हैं अपनी जड़ता में ।
निरर्थकता में सीना ताने खड़े हैं
बहुत ऊंचे हैं अपनी जड़ता में ।
जड़ में जड़ जमाये हैं पेड़
तन का आकार नहीं
ध्वजा की ऊँचाई लिए
वस्त्र सा सम्मान बने ।
तन का आकार नहीं
ध्वजा की ऊँचाई लिए
वस्त्र सा सम्मान बने ।
पहाड़ कुछ ना कुछ बोलते रहते हैं
पेड़ हैं कि लहराते हैं सुनते हुये ।
पेड़ हैं कि लहराते हैं सुनते हुये ।
अ से
I do not love you --- Pablo Neruda
प्यार करता नहीं हूँ मैं तुमसे पर मुझे प्यार है तुमसे
और प्यार करता हूँ पर प्यार मिलने के लिए नहीं
तब भी इंतज़ार करता हूँ जब मुझे उम्मीद ना हो
शांत जलने लगता है दिल मेरा
मुझे तुमसे प्यार है सिर्फ इसलिए कि मुझे तुमसे प्यार है
मुझे नफरत है तुमसे बेइंतेहा मुझे इस बेबसी से नफरत है
और तुम्हारे लिए मेरे प्रेम के बदलाव का पैमाना
तुम्हें देखना नहीं है बल्कि आँखें बंद करके प्रेम करना है
जबकि शायद जनवरी की रौशनी जला देगी
इसकी निर्मम किरणों से मेरे दिल को
चुराकर मेरी चाभी सच्ची शांति की राह की
पर इस कहानी में सिर्फ मैं हूँ जिसे मरना है
और मैं मरूँगा इस प्यार से कि मुझे प्यार है तुमसे
कि मुझे प्यार है तुमसे , प्रिय , रक्त में और रौशनी में ।
और प्यार करता हूँ पर प्यार मिलने के लिए नहीं
तब भी इंतज़ार करता हूँ जब मुझे उम्मीद ना हो
शांत जलने लगता है दिल मेरा
मुझे तुमसे प्यार है सिर्फ इसलिए कि मुझे तुमसे प्यार है
मुझे नफरत है तुमसे बेइंतेहा मुझे इस बेबसी से नफरत है
और तुम्हारे लिए मेरे प्रेम के बदलाव का पैमाना
तुम्हें देखना नहीं है बल्कि आँखें बंद करके प्रेम करना है
जबकि शायद जनवरी की रौशनी जला देगी
इसकी निर्मम किरणों से मेरे दिल को
चुराकर मेरी चाभी सच्ची शांति की राह की
पर इस कहानी में सिर्फ मैं हूँ जिसे मरना है
और मैं मरूँगा इस प्यार से कि मुझे प्यार है तुमसे
कि मुझे प्यार है तुमसे , प्रिय , रक्त में और रौशनी में ।
translated from --- I do not love you --- Pablo Neruda
Mar 1, 2015
अब ये बरसात मुझे नहीं भिगोती
अब ये बरसात मुझे नहीं भिगोती
अब
फेंके हुये पत्थर मुझे चोट नहीं पहुंचाते
अब
साधे हुये व्यंग्य बाण मुझे नहीं भेद पाते
अब
दौड़ती हुयी दुनिया मुझे पीछे नहीं छोड़ पाती
अब
बहुत शांति है मेरे स्वप्नों में
अब
कुछ भी शेष नहीं ।
कोई भी शोर नहीं ।
सुकून है
एक रात का ।
एक शाश्वत रात का सुकून ।
अ से
Feb 25, 2015
koan
कितने कोआन थे यहाँ ,
अब तलाशो तो एक नहीं ,
एक पहेली थी तुम ,
एक पहेली थी तुम ,
जब तक मुझे पता ना था ,
मैं सुलझाता था तुम्हें ,
मैं सुलझाता था तुम्हें ,
थोड़ा और उलझ जाता था ,
तुम्हें डर था समय से पहले अपना जादू खो देने का
मुझे खोज लेना था बाहर का एक रास्ता समय रहते
पर ना तो तुम जादूगरनी थी ना मुझे ही कहीं जाना था ।
कैसा जादू है तुम्हारा कि अब
मुझ पर कोई जादू नहीं चलता
कैसा जादू है तुम्हारा
जो खत्म नहीं हुआ पर अब असर नहीं करता
कैसी पहेली हो तुम
कैसी पहेली हो तुम
जो उलझी हुयी हो पर सुलझा दिया है मुझे
और कैसा मैं हूँ कि
और कैसा मैं हूँ कि
मेरे पास नहीं है कोई रास्ता
पर चले जाना है ।
Feb 24, 2015
इतना अकेला सा था कुछ
इतना अकेला सा था कुछ
जैसे सब कुछ हो अकेला अकेला
और सब कुछ रुका पड़ा हो साथ में ।
भरे हुये प्लेटफार्म से सबको लेकर
जाने के बाद दोनों ट्रेन के
एक दायें और एक बाएँ
के बीचों बीच का निर्जीव शून्य ।
जाने के बाद दोनों ट्रेन के
एक दायें और एक बाएँ
के बीचों बीच का निर्जीव शून्य ।
इतना खोया सा था कुछ
जैसे सब कुछ हो खोया खोया
और सब कुछ दिख रहा हो सामने ।
जैसे सब कुछ हो खोया खोया
और सब कुछ दिख रहा हो सामने ।
पूरे संसार को समेटकर एक फूल में
दे दिये जाने के बाद किसी को
लबों से सुनाई पड़े इनकार
के ठीक सामने की गहरी उदासी ।
दे दिये जाने के बाद किसी को
लबों से सुनाई पड़े इनकार
के ठीक सामने की गहरी उदासी ।
इतना अधूरा सा था कुछ
जैसे सब कुछ हो अधूरा अधूरा
और पूरा का पूरा बैठा हो साथ में ।
जैसे सब कुछ हो अधूरा अधूरा
और पूरा का पूरा बैठा हो साथ में ।
अपनी हक़ीक़त से लड़कर
अपराध बोध के साथ
सागर किनारे नाराज़
साथ बैठा हुआ ख्वाब ।
अपराध बोध के साथ
सागर किनारे नाराज़
साथ बैठा हुआ ख्वाब ।
अ से
Feb 21, 2015
विपर्यय : 1
लहर लहर प्रवाहमान
जल की तरंगों में
वृक्ष बन देखता हूँ
अपना अक्स
किसी रस्सी सा
और बहने लगता हूँ
किसी सर्प सा !
अ से
प्रेम पाषाण
तुम मत झाँको उसमें गहरे
भले ही वो ये चाहती है
वो नहीं छिपा पाएगी अपना प्रेम
तुम कोशिश भी मत करो झाँकने की ।
तुम मत पूछो उससे फिर फिर
कि क्या उसे प्रेम है तुमसे
कि कितना प्रेम है उसे तुमसे
भले ही वो ये चाहती है
वो नहीं जता पाएगी अपना प्रेम
तुम कोशिश भी मत करो जानने की ।
तुम मत समझाओ उसे कुछ भी
कि क्या नहीं करना चाहिए उसे
कि उसका क्या करना पसंद है तुम्हें
कि कैसा देखना चाहते हो तुम उसे
भले ही वो ढल जाएगी वैसे
पर नहीं रह पाएगी वो स्वाभाविक
वो नहीं रह पाएगी जो वो है ॥
यदि तुम प्रेम करना चाहते हो उसे
उसे करने दो ।
उसकी आँखों में खुद ही उतर आएगी
एक परत नमी की
तुम्हारे देखते ही
और तुम्हारे देखते ही देखते
उड़ जाएगी धूप में ओस बनकर
और महक जाएगा उसका प्रेम ।
और वो करेगी
वो सब कुछ
जैसा तुम चाहते हो
वो ढल जाएगी
अकहे ही तुम्हारे प्रेम में ॥
उसे करने दो ।
उसकी आँखों में खुद ही उतर आएगी
एक परत नमी की
तुम्हारे देखते ही
और तुम्हारे देखते ही देखते
उड़ जाएगी धूप में ओस बनकर
और महक जाएगा उसका प्रेम ।
और वो करेगी
वो सब कुछ
जैसा तुम चाहते हो
वो ढल जाएगी
अकहे ही तुम्हारे प्रेम में ॥
वो पाषाण है
ठोस भावनाओं की
जो बन जाएगी
एक सुंदर मूरत
ये उसका स्वभाव है ।
मत चोट करो उस पर
उसे मत कुरेदो
मत खुरचो
वो ढल जाएगी
तुम्हारी उपस्थिती मात्र से ॥
ठोस भावनाओं की
जो बन जाएगी
एक सुंदर मूरत
ये उसका स्वभाव है ।
मत चोट करो उस पर
उसे मत कुरेदो
मत खुरचो
वो ढल जाएगी
तुम्हारी उपस्थिती मात्र से ॥
वो है एक पाषाण
प्रेम पाषाण ॥
अ से
प्रेम पाषाण ॥
अ से
एक ताजा सुबह
पूर्व के वृक्ष पर
खिलता एक लाल गुलाब
महकती सुगंध रौशनी की
पत्तियों की चहचहाट
बिना और कोई आवाज़ ।
हवा का पूर्ण परास
पवित्रता की श्वास
शीतलता के होठों का
पलकों पर आश्वास ।
पवित्रता की श्वास
शीतलता के होठों का
पलकों पर आश्वास ।
मृत्यु के हाथों
सौंप दी गयी सत्ता
नए दिन का जन्म
एक ताजा सुबह ।
अ से
सौंप दी गयी सत्ता
नए दिन का जन्म
एक ताजा सुबह ।
अ से
Feb 20, 2015
पुरस्कार
उनके पास बहुत से हैं
सो वो दे देते हैं या बाँट देते हैं
कि पुरस्कार
अहंकार है देने वालों का
सम्मान के वस्त्रों में
अपने कोषागार में से
वो बाँट देते हैं एक अंश अपने दंभ का ।
सो वो दे देते हैं या बाँट देते हैं
कि पुरस्कार
अहंकार है देने वालों का
सम्मान के वस्त्रों में
अपने कोषागार में से
वो बाँट देते हैं एक अंश अपने दंभ का ।
ये उत्सुकता है पाने की
कुछ पा जाने की ललक
हर उस चीज के लिए जो बँट रही हो
महत्वपूर्ण है कितना मिल रहा है
क्या बँट रहा है से ,
कि सम्मान भी किसी वस्तु की तरह बँटता है
फिर फिर अपने को दे की तर्ज पर ।
कुछ पा जाने की ललक
हर उस चीज के लिए जो बँट रही हो
महत्वपूर्ण है कितना मिल रहा है
क्या बँट रहा है से ,
कि सम्मान भी किसी वस्तु की तरह बँटता है
फिर फिर अपने को दे की तर्ज पर ।
पारितोषिक साधन है सामान्यतः
किसी की जीविका का
पर पुरस्कार
पुरस्कार एक तिरस्कार है
किसी काम की खूबसूरती के साथ
अपना नाम जोड़ने का
सम्मान का अपमान
एक बड़े मंच पर की गयी जादूगरी
जिसका भेद कैद होता है पर्दे के पीछे
बड़ी कुशलता से मारे गए पंछियों में ।
किसी की जीविका का
पर पुरस्कार
पुरस्कार एक तिरस्कार है
किसी काम की खूबसूरती के साथ
अपना नाम जोड़ने का
सम्मान का अपमान
एक बड़े मंच पर की गयी जादूगरी
जिसका भेद कैद होता है पर्दे के पीछे
बड़ी कुशलता से मारे गए पंछियों में ।
पुरस्कार दिया जा रहा है या लिया जा रहा है
क्या सचमुच ये किसी के काम का कोई सम्मान है
कि उसे घोड़ों के साथ रेस में दौड़ा दिया जाये
या तय कर दी जाये कीमत खूबसूरत काम की
या बड़ा दी जाये उसके नाम की ।
क्या सचमुच ये किसी के काम का कोई सम्मान है
कि उसे घोड़ों के साथ रेस में दौड़ा दिया जाये
या तय कर दी जाये कीमत खूबसूरत काम की
या बड़ा दी जाये उसके नाम की ।
उनके पास बहुत से हैं
जब उन्हे देने होंगे तो वो दे देंगे
किसी भी नाम से
जब उन्हे बांटने होंगे वो बाँट देंगे
किसी भी काम पर
वो राजा है स्व्यंसिद्ध
वो निर्णायक है महाभारत के
वो रचयिता है किसी की नियति के
और वास्तव में
वो ही हक़दार हैं सच्चे पुरस्कार के
जब उन्हे देने होंगे तो वो दे देंगे
किसी भी नाम से
जब उन्हे बांटने होंगे वो बाँट देंगे
किसी भी काम पर
वो राजा है स्व्यंसिद्ध
वो निर्णायक है महाभारत के
वो रचयिता है किसी की नियति के
और वास्तव में
वो ही हक़दार हैं सच्चे पुरस्कार के
कि देखते ही बनती है
जुगाड़ बैठाने वालों की कुशलता ।
जुगाड़ बैठाने वालों की कुशलता ।
अ से
और जब गर्भ का स्पंदन खो गया ...
और जब गर्भ का स्पंदन खो गया
सृष्टि का अज्ञातमात्र सो गया
चेत का समवेत स्वर लुप्त हो गया
सृजन का मूल शब्द सुप्त हो गया
ब्रह्मा बिखर कर वेदहीन हो गया
संसार विसर्ग में विहीन हो गया ।
सृष्टि का अज्ञातमात्र सो गया
चेत का समवेत स्वर लुप्त हो गया
सृजन का मूल शब्द सुप्त हो गया
ब्रह्मा बिखर कर वेदहीन हो गया
संसार विसर्ग में विहीन हो गया ।
एक पल को
शिव ने शक्ति को जीर्ण कर दिया
कारण अकारण सब क्षीर्ण कर दिया
अब प्रकाश के लिए आकाश ना हुआ
आकाश के लिए अवकाश ना हुआ
वियोगी अंतर्ध्यान रहा
शून्य , एक , सब अ-मान रहा ।
शिव ने शक्ति को जीर्ण कर दिया
कारण अकारण सब क्षीर्ण कर दिया
अब प्रकाश के लिए आकाश ना हुआ
आकाश के लिए अवकाश ना हुआ
वियोगी अंतर्ध्यान रहा
शून्य , एक , सब अ-मान रहा ।
तभी वो पल किसी में लीन हो गया
गिना ना जा सका बस तीन हो गया
शिव को अपना भान हो आया
फिर से शक्ति का ध्यान हो आया
आकाश का अवकाश समाप्त हो गया
प्रकाश दिक-काल में व्याप्त हो गया
शिव से आत्म में बैठा ना गया
इतना प्रचंड समेटा ना गया ।
गिना ना जा सका बस तीन हो गया
शिव को अपना भान हो आया
फिर से शक्ति का ध्यान हो आया
आकाश का अवकाश समाप्त हो गया
प्रकाश दिक-काल में व्याप्त हो गया
शिव से आत्म में बैठा ना गया
इतना प्रचंड समेटा ना गया ।
एक से तीन हुये तीन से नो
बिखर गए शक्ति में कण कण हो
सब ओर भ्रम पर कहीं कोई योग नहीं
महामाया पर चल सका कोई प्रयोग नहीं
और तब
हार कर क्षरण ली फिर अपनी ही शक्ति की
हाथ जोड़ नमन कर महामाया की भक्ति की ।
बिखर गए शक्ति में कण कण हो
सब ओर भ्रम पर कहीं कोई योग नहीं
महामाया पर चल सका कोई प्रयोग नहीं
और तब
हार कर क्षरण ली फिर अपनी ही शक्ति की
हाथ जोड़ नमन कर महामाया की भक्ति की ।
अ से
Feb 14, 2015
यिन येन
वो दोनों परस्पर
आते हैं सामने
मिलना चाहते हैं
मिल जाना चाहते हैं ।
एक दायें झुकता है
दूसरी बाएँ
हो जाते हैं
यिन और येन
एक दायें झुकती है
दूसरा बाएँ ।
दूसरी बाएँ
हो जाते हैं
यिन और येन
एक दायें झुकती है
दूसरा बाएँ ।
और फिर
हर दिशा प्रतिदिशा में
घूमते हैं
एक लयबद्ध गति में
नृत्य करते हैं
बहते संगीत में
मिल जाना चाहते हैं
घुल जाना चाहते हैं ... ।
और ठहर जाते हैं ।
हर दिशा प्रतिदिशा में
घूमते हैं
एक लयबद्ध गति में
नृत्य करते हैं
बहते संगीत में
मिल जाना चाहते हैं
घुल जाना चाहते हैं ... ।
और ठहर जाते हैं ।
ठहरकर
देखते हैं शून्य में
फैली एक मुस्कान को
दूर होती थकान को ।
देखते हैं शून्य में
फैली एक मुस्कान को
दूर होती थकान को ।
और
देखते देखते
बहने लगते हैं
तीसरी दिशा में ... ।
देखते देखते
बहने लगते हैं
तीसरी दिशा में ... ।
बह जाते हैं ।
its a koan
its a koan ,
what is it she want
and i asked not
and i will never
may it took
the time for ever
as i want it
to work in my favour
so the magic of it
lose must not .
what is it she want
and i asked not
and i will never
may it took
the time for ever
as i want it
to work in my favour
so the magic of it
lose must not .
i want to work
and work upon
i want to think
and think for long
i have to know it
so i will prolong
untill it shapes me
into what she want .
and work upon
i want to think
and think for long
i have to know it
so i will prolong
untill it shapes me
into what she want .
Feb 13, 2015
देह मुक्त कर देना चाहती है ...
देह मुक्त कर देना चाहती है आत्मा को मेरी ,
आत्मा चीखती है अँधेरों से घबराकर
और कोई आवाज़ भर नहीं होती
कि शब्द स्फुटित नहीं होते ।
आत्मा जकड़े रहना चाहती है देह को मेरी ,
देह जलने लगती है रौशनी में आकर
और कोई बुझा नहीं पाता इसे
कि प्यास बुझती नहीं है ।
देह जलने लगती है रौशनी में आकर
और कोई बुझा नहीं पाता इसे
कि प्यास बुझती नहीं है ।
अ से
Feb 11, 2015
मैं देखता हूँ अपने आस पास ...
नींद खुलती है और मैं देखता हूँ अपने आस पास
सबकुछ , अँधेरा और रौशनी और अपनी ऊर्जा
महसूस करता हूँ ,
और उठ बैठता हूँ ,
बिस्तर से उतरता हूँ कदम जमीन पर रखता हूँ
और लड़खड़ाता हूँ चलने की कोशिश में
और संतुलन को पुनः स्मृत कर संभल जाता हूँ
मैं चलने लगता हूँ ।
मैं चलने लगता हूँ भोर की रौशनी में
दिन धूप भाग दौड़ करता हूँ
और फिर शाम को सहेज लाता हूँ बचे हुये पल
बची हुयी ऊर्जा के
फिर से स्मृत करता हूँ अपना संतुलन
पंजों को आराम देता हूँ
और अँधेरा घिर आता है ।
अभी बहुत कुछ है जिसे आराम देना है पर
अभी काफी वक़्त है फिर से सुबह होने में
और उतार देता हूँ ये वस्त्र
कि अभी इनकी जरूरत नहीं ।
दिन धूप भाग दौड़ करता हूँ
और फिर शाम को सहेज लाता हूँ बचे हुये पल
बची हुयी ऊर्जा के
फिर से स्मृत करता हूँ अपना संतुलन
पंजों को आराम देता हूँ
और अँधेरा घिर आता है ।
अभी बहुत कुछ है जिसे आराम देना है पर
अभी काफी वक़्त है फिर से सुबह होने में
और उतार देता हूँ ये वस्त्र
कि अभी इनकी जरूरत नहीं ।
अ से
Feb 10, 2015
वक्त खामोश है
1.
वक्त खामोश है
पर लहरोँ का शोर सुनाई देता है
और कभी कभी सुनाई देती है
खामोशी उसकी ,
कभी कभी ही तो शांत होती है वो
या अक्सर तब जब वो उदास होती है ।
पर लहरोँ का शोर सुनाई देता है
और कभी कभी सुनाई देती है
खामोशी उसकी ,
कभी कभी ही तो शांत होती है वो
या अक्सर तब जब वो उदास होती है ।
शांत रातोँ मेँ मन का पोत इसी तरह हिलोरेँ खाता है ,
जब कुछ गुज़र जाता है तो वो एक लहर बन जाता है
और हर एक लहर के साथ थोड़ा और ठहर जाते हैँ हम ।
जब कुछ गुज़र जाता है तो वो एक लहर बन जाता है
और हर एक लहर के साथ थोड़ा और ठहर जाते हैँ हम ।
वो भी रात के खाली आसमान सी
ठहर चुकी है
और हर एक गुज़रते लफ्ज़ के साथ
गहराती जाती है
और उस गहराई से उठती रहती हैँ
अनजान बातें ,
जिनमेँ से कुछ भूलता रहता हूँ और कुछ
रह जाती है ठहरी हुयी
अगर साथ होता कुछ और वक्त
कुछ और लहरेँ उठती ,
कुछ और ठहर जाते
हम लोग ।
ठहर चुकी है
और हर एक गुज़रते लफ्ज़ के साथ
गहराती जाती है
और उस गहराई से उठती रहती हैँ
अनजान बातें ,
जिनमेँ से कुछ भूलता रहता हूँ और कुछ
रह जाती है ठहरी हुयी
अगर साथ होता कुछ और वक्त
कुछ और लहरेँ उठती ,
कुछ और ठहर जाते
हम लोग ।
घड़ियाँ घूम रही हैँ पर अब उनमेँ
आकर्षण नहीँ इंतज़ार का
वो टहल रही हैँ किसी बूढ़ी सुन्दरी सी
बिना किसी उम्मीद
और मैँ इन ठहरी हुयी आँखो से
नहीँ देखता कुछ सिवाय
चित्राये हुये एक स्वप्न के
जिसमेँ चलती हैँ कुछ लहरेँ
आँखों में लगती हवा की
और कुछ ठहर गयी हैं वहीं ।
आकर्षण नहीँ इंतज़ार का
वो टहल रही हैँ किसी बूढ़ी सुन्दरी सी
बिना किसी उम्मीद
और मैँ इन ठहरी हुयी आँखो से
नहीँ देखता कुछ सिवाय
चित्राये हुये एक स्वप्न के
जिसमेँ चलती हैँ कुछ लहरेँ
आँखों में लगती हवा की
और कुछ ठहर गयी हैं वहीं ।
जैसे जैसे जवान होती है ये रात
ये लहरेँ होती हैँ अपने शबाब पर
पर फिर बूढ़ी होती रात के साथ ही ये भी
दम तोड़ने लगती हैँ किसी ख्वाब की तरह
और फिर से होती है एक सुबह
और फिर से शुरु होता है
रात का इंतेज़ार ।
ये लहरेँ होती हैँ अपने शबाब पर
पर फिर बूढ़ी होती रात के साथ ही ये भी
दम तोड़ने लगती हैँ किसी ख्वाब की तरह
और फिर से होती है एक सुबह
और फिर से शुरु होता है
रात का इंतेज़ार ।
2.
वक्त खामोश है
पर मन
घूमता रहता है अब भी
सँकरे गलियारोँ मेँ इसके ,
तलाशता है
जाना पहचाना चेहरा कोई
कोई जगह सुकूनबख्श ,
ये ठहर सके जहाँ
और भर सके फेफड़ोँ को
आश्वस्तता से ।
पर मन
घूमता रहता है अब भी
सँकरे गलियारोँ मेँ इसके ,
तलाशता है
जाना पहचाना चेहरा कोई
कोई जगह सुकूनबख्श ,
ये ठहर सके जहाँ
और भर सके फेफड़ोँ को
आश्वस्तता से ।
इस प्रपञ्च को लगातार
देखते सुनते समझते
बोझिल हो जाता ये मन
चाहता है
अलग कर लेना खुद को
पर सूखने लगते हैँ प्राण
कोशिश भर मेँ
कि आँखें बंद होती हैं
और सामने आ जाती है प्यास
उसे फिर से देखने की
उसे फिर फिर देखने की कि जैसे
अगले ही मोड़ पर खड़ा हो अतीत ।
देखते सुनते समझते
बोझिल हो जाता ये मन
चाहता है
अलग कर लेना खुद को
पर सूखने लगते हैँ प्राण
कोशिश भर मेँ
कि आँखें बंद होती हैं
और सामने आ जाती है प्यास
उसे फिर से देखने की
उसे फिर फिर देखने की कि जैसे
अगले ही मोड़ पर खड़ा हो अतीत ।
जिन खुली आँखो मेँ ये पूरा संसार
सबब होता है बैचेनी का
उन्ही अधखुली आँखो को एक चेहरा
सुकून देता है शाश्वतता का
और उसको देखने की चाह
अधीरता ।
सबब होता है बैचेनी का
उन्ही अधखुली आँखो को एक चेहरा
सुकून देता है शाश्वतता का
और उसको देखने की चाह
अधीरता ।
मन
भटक रहा है
वक़्त के गलियारों में
बेतरह बेसबब
वो दोराहे
छूट चुके हैँ बहुत पीछे
और चाहतेँ
सिमट चुकी हैँ
चलन के चौराहोँ पर
पर वो चेहरा
नज़र नहीँ आता किसी ओर
इन रास्तों के कुहासे में
और इस सब के बावजूद
आसान नहीँ अब भी
बँद कर पाना आँखें पूरी तरह
कि मन
कि मन फिर फिर दौड़ता है
एक शाश्वत प्यास में ।
भटक रहा है
वक़्त के गलियारों में
बेतरह बेसबब
वो दोराहे
छूट चुके हैँ बहुत पीछे
और चाहतेँ
सिमट चुकी हैँ
चलन के चौराहोँ पर
पर वो चेहरा
नज़र नहीँ आता किसी ओर
इन रास्तों के कुहासे में
और इस सब के बावजूद
आसान नहीँ अब भी
बँद कर पाना आँखें पूरी तरह
कि मन
कि मन फिर फिर दौड़ता है
एक शाश्वत प्यास में ।
अ से
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