Oct 17, 2014

लहरें


जानता हूँ
तुम मुझसे कहोगी
गहरे उतरो और देखो
भीतर कितनी शांती है
पर ये लहरें जो ऊपर हैं 
और उनका अथाह शोर
क्या उसे अनदेखा किया जाये
या नकार दिया जाये साफ़ ही !
ये लहरें
जो बहा ले जाती हैं
प्यासे जीवों को
किनारों से उखाड़कर
अनंतता के भंवर में !
सामान्यतः
असर नहीं होता
किनारों पर लहरों की चोट का
पर किनारों पर खड़े
असावधान लोग
और उनके कदम
लड़खड़ा जाते हैं !
तुम शायद नहीं जानती
वजह नहीं चाहिए होती
डूब जाने के लिए कोई भी
डूब जाना
झपकना भर है पलकों का
कब झपकी थी
ये याद नहीं आता
याद आता है तो बस इतना
कि जब कभी जागते हो अंगड़ाई लेकर
तो खुद को उतरती लहरों के बीच पाते हो !!
अ से

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