Dec 21, 2013

ज्ञान विज्ञान

अश्वत्थ सा आत्मकेन्द्रित, तुलसी सा पवित्र विज्ञान ,
साध, भक्ति और समर्पण के साथ ।

बाँस और गन्ने सा बढता उत्तरोत्तर ज्ञान ,
सुगंध और मिठास की ऊर्ध्वाधर दिशा लिए ।

आम्र सा फलदायी , नीम सा गुणकारी ,
अपने को उपयोगी बनाने की होड़ में ।

विद्या के पौधे सा वेद्वित ,
ज्ञान शाखाओं की अनन्तता का भान कराता हुआ ।

वृहत से मूल , पत्ते से बीज तक की यात्रा ,
और उसका उपयोग जीव जगत की भलाई ..

व्यापक का आवश्यक खाँका खींचने की कला है ज्ञान विज्ञान ,
ना की बरगद की तरह फैलते विचारों को अस्तित्व देने का नाम ..

जमीन पानी और हवा हर जगह जडें फ़ैलाने वाला ,
सारे रसों और वेदनाओं में फंसा हुआ ,
हर ओर बढता फिर भी दिशाहीन ,
बिना रुके देखता , बिना सोचे चलता ,
कुबेर की तरह संचय को ही जीवन माने हुए ।

एक प्राचीन कहावत है , " बरगद और पीपल एक दुसरे की छाया तले नहीं पनपते " ,
कुछ ऐसी ही स्थिति वर्तमान दुनिया में उन लोगों की है ,
जिनके लिए जीवन , साधना और बोधि-वृक्ष हुआ करता है ॥

< अ-से >

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