कुछ लिखने का मन है , क्या लिखूं !!
सागर नदी झील झरने तो सब लिखे जा चुके ,
चलो लिखते हैं एक चुल्लू भर पानी ,
कि क्या इसमें डूब कर मरा जा सकता है ,
हुम्मं !! डूबने के लिए पानी नहीं , संवेदनाएँ चाहिए ,
तैरती तो लाशें भी है ॥
हवा फिजा घटा समां भी खूब काले हुये हैं कागजों पर ,
चलो लिखते हैं , एक खुली साँस ,
कि क्या इससे कुछ बदल जाता है ,
हाँ , सोचने के लिए सिर्फ हवा नहीं , आज़ाद समां भी चाहिए ,
साँसें तो पिंज़रे के पंछी भी लेते हैं ॥
प्यार तकरार जंग और जूनून ने भी खूब किताबें जलाई है ,
चलो लिखते हैं , एक स्वच्छंदता ,
की क्यों उलझा पड़ा है इंसान समाज के जंजाल में ,
अरे , कैसे बन पाएंगे कुछ लोग भगवान् ,
अपने में तो इंसान भी जी लेते हैं ॥
< अ-से >
सागर नदी झील झरने तो सब लिखे जा चुके ,
चलो लिखते हैं एक चुल्लू भर पानी ,
कि क्या इसमें डूब कर मरा जा सकता है ,
हुम्मं !! डूबने के लिए पानी नहीं , संवेदनाएँ चाहिए ,
तैरती तो लाशें भी है ॥
हवा फिजा घटा समां भी खूब काले हुये हैं कागजों पर ,
चलो लिखते हैं , एक खुली साँस ,
कि क्या इससे कुछ बदल जाता है ,
हाँ , सोचने के लिए सिर्फ हवा नहीं , आज़ाद समां भी चाहिए ,
साँसें तो पिंज़रे के पंछी भी लेते हैं ॥
प्यार तकरार जंग और जूनून ने भी खूब किताबें जलाई है ,
चलो लिखते हैं , एक स्वच्छंदता ,
की क्यों उलझा पड़ा है इंसान समाज के जंजाल में ,
अरे , कैसे बन पाएंगे कुछ लोग भगवान् ,
अपने में तो इंसान भी जी लेते हैं ॥
< अ-से >