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उसकी कोई बात नहीं ,
बस तुम्हारीं आँखें ,
इन्हें थोडा विस्तार ले लेना चाहिए अब ,
निश्चिंतता से ,
इसमें चमकता सा तारा हो कोई ,
ख़ुशी का ,
और तुम्हारे गाल ,
थोड़े फूल जाने चाहिए ,
सुकून की हवा से ,
खिल ही जायेंगे ,
अगर तुम चहकती रहो ,
और तुम्हारा चित्त ,
इसे थोडा ठहर जाना चाहिए ,
फ़िक्र कुछ कम करो , दुनियावी ,
रहो की जैसे ये सब कुछ ,
बहुत मायने नहीं रखता तुम्हारे लिए ,
की तुम हो तो तुम्हारी दुनिया है तो ये सब लोग हैं ,
सुन्दर तो तुम हो , निश्चित ही ,
तुम बस खिलकर आओ सामने ,
खुलकर जियो ,
सहना तो हर हाल में है आखिर ,
जश्न भी है जख्म भी है ये जिंदगी !!
~ अ-से
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