Mar 11, 2014

स्त्री -2

तुम सुन्दर तो हो ही 
उसकी कोई बात नहीं ,

बस तुम्हारीं आँखें ,
इन्हें थोडा विस्तार ले लेना चाहिए अब ,
निश्चिंतता से ,
इसमें चमकता सा तारा हो कोई ,
ख़ुशी का ,

और तुम्हारे गाल ,
थोड़े फूल जाने चाहिए ,
सुकून की हवा से ,
खिल ही जायेंगे ,
अगर तुम चहकती रहो ,

और तुम्हारा चित्त ,
इसे थोडा ठहर जाना चाहिए ,
फ़िक्र कुछ कम करो , दुनियावी ,
रहो की जैसे ये सब कुछ ,
बहुत मायने नहीं रखता तुम्हारे लिए ,
की तुम हो तो तुम्हारी दुनिया है तो ये सब लोग हैं ,

सुन्दर तो तुम हो , निश्चित ही ,
तुम बस खिलकर आओ सामने ,
खुलकर जियो ,

सहना तो हर हाल में है आखिर ,
जश्न भी है जख्म भी है ये जिंदगी !!

~ अ-से

No comments: