Mar 11, 2014

स्त्री : 1

ग़म के अंधेरों में , 
ख़ामोशी लिबास ओढ़े , 
सिसकते एहसास , 
जहन में जलती रंगीन रोशनियाँ ,
और आँखों में सूखता जाता इंतज़ार ...

तेरे सृष्ट में समाई तेरी हर एक बयानी ॥

घायल एहसासों सी रीढ़ ,
बिखरे भरोसों के झुके काँधे ,
छलनी सा छिद्रित मन ,
और फिर से आस लगाता प्यार ...

तेरा पृष्ठ कहता है तेरी हर एक कहानी ॥

.................................................. ~ अ-से

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