Mar 11, 2014

मेरी अकड़

मैं और मेरी अकड़ ,
अक्सर ये बातें करते हैं ,
अगर मैं कीड़ा होता ,
कैसे दिखते मुझे ये लोग सारे ,
क्या दिखते भी ,
ये सारे पृथ्वी वासी देव गण ,
अकेले ही ,
कुरेदता रहता कोई एक ही डंठल ... 

मैं और मेरी अकड़ ,
अक्सर ये बातें करते हैं ,
अगर मैं सुअर होता ,
सोया रहता कीचड में ,
बेफिक्र ,
किसी और सूअर से सटा हुआ ,
रह लेता कहीं भी ...

मैं और मेरी अकड़ ,
अक्सर ये बातें करते हैं ,
अगर मैं कुत्ता होता ,
खुजली वाला ,
जगह जगह होते घाव ,
ना कोई मरहम ,
ना कोई पूछने सुधने वाला ,
पड़ा रहता कहीं भी ,
बिना किसी की आस लगाये ...

रोता नहीं , पुकारता नहीं , कम से कम किसी इंसान को तो बिलकुल नहीं !!

अ-से 

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