Sep 18, 2014

खामोशी



जैसे अर्थ बदल सा जाता है शब्द का वाक्य के साथ
वैसे ही कुछ तेरी खामोशी का भी वाक़िये के साथ
पता है ख़ामोशी भी एक शब्द है
मायने जिसके काफी गहरे और गंभीर हैं
ताश के जोकर की तरह
कहीं भी लगाया जा सकता है इसे
वो तुरुप का पत्ता है ये
जो कहीं भी चला जा सकता है
बस एक बार खुद को समझ आ जाएँ
इसके सही अनुप्रयोग
सिर्फ शब्द ही मोड़ नहीं देते
एक कहानी को
ख़ामोशी भी बदल देती है
बुरी तरह से
एक लम्बी ख़ामोशी भी
ले आती है बदलाव
कभी ना लौटा सकने वाला
बहुत भारी शब्द है
ये खामोशी
झिलमिलातें हैं जिसमें कई रंग
बैरंग होते हुए भी
ठीक सांझ की झील की तरह
नज़र आते हैं घुलते लहराते
सतत रंग बिरंगे आकार इसमें
पर हर शब्द एक बात है
उस पर ख़ामोशी
एक ख़ास बात
कि इसमें तलाशे जा सकते हैं
फिर अपने ही मायने
कि हर कोई तलाशता है
पर आखिर पता किसे होता है
और हो जाया करती हैं इसीलिए
ग़लतफहमियाँ कई दफा
अब मेरी इस ख़ामोशी को अन्तराल ना समझना अपने बीच ,
ये तो भरी जा रही है नयी पुरानी रंग बिरंगी खट्टी मीठी कहानियों से ॥
अ से 

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