समाधि-लेख
सोचता था स्वयं को श्रेष्ठ यहाँ करता है विश्राम
विश्व-पटल के कवियों में एक
जीवन में उसने ना खुशी पायी ना आराम
विश्व-पटल के कवियों में एक
जीवन में उसने ना खुशी पायी ना आराम
भरा था पागलपन से कई धुनों पर सवार
और जिस भी उम्र में मरा हो वो
ज्यादा ही जी लिया हर किरदार
और जिस भी उम्र में मरा हो वो
ज्यादा ही जी लिया हर किरदार
भावनाओं की उथल पुथल में डूबा
वो जीता था खोखले अहंकार में
अंतर्द्वंदों से ग्रस्त अंतहीन विचार में
वो जीता था खोखले अहंकार में
अंतर्द्वंदों से ग्रस्त अंतहीन विचार में
बिना साहस वो अपना किरदार ढोता रहा
जिस भी कहानी का हिस्सा हुआ
जीवन की अंतहीन हाय-हाय में रोता रहा
जिस भी कहानी का हिस्सा हुआ
जीवन की अंतहीन हाय-हाय में रोता रहा
अपने दुखों और डर का बना रहा गुलाम
और रखता था जो कुछ बेतुके विचार
अंत तक साथ रखता रहा सरे आम
और रखता था जो कुछ बेतुके विचार
अंत तक साथ रखता रहा सरे आम
पेश आया बुराई से जिन्हें वो करता था प्यार
रहा खुद ही अपना सबसे बड़ा दुश्मन
कलावादी सोच का बीमार
रहा खुद ही अपना सबसे बड़ा दुश्मन
कलावादी सोच का बीमार
अपने बारे में जब भी कुछ कहा उसने
काबिल नहीं था किसी के सम्मान के
उधेड़बुन में खोया रहा बस अपने ही जहान के
काबिल नहीं था किसी के सम्मान के
उधेड़बुन में खोया रहा बस अपने ही जहान के
उसकी सारी क्रांतियाँ निकली बेवजह बेकार
अपने डर तकलीफ़ों के प्रति संवेदना शून्य
अधिकतर रही बेरीढ़ निराधार
अपने डर तकलीफ़ों के प्रति संवेदना शून्य
अधिकतर रही बेरीढ़ निराधार
कमीना ऐसे और बेकार की उसकी परेशानियां
उसके शब्द , जबकि नीम से भी ज्यादा कड़वे
उसकी कड़वाहट को नहीं कर पाए बयां
उसके शब्द , जबकि नीम से भी ज्यादा कड़वे
उसकी कड़वाहट को नहीं कर पाए बयां
ऐसा था वो दुखी और अभागा
जो अब भी सिसक सकता है करुणा में
जिसके पागलपन का पता किसी को नहीं लगा
जो अब भी सिसक सकता है करुणा में
जिसके पागलपन का पता किसी को नहीं लगा
ना करने दें एक स्वस्थ मानस को
प्रदूषित उसकी कबर , आराम से गुज़र जाने दें
देशद्रोहियों और वेश्याओं को पर
प्रदूषित उसकी कबर , आराम से गुज़र जाने दें
देशद्रोहियों और वेश्याओं को पर
शराबी और व्यभिचारी गुज़र सकते हैं वहां से
पर जल्दी , इससे पहले कि पता चले
हो सकता है , खुश हों वो किसी अफवाह से
पर जल्दी , इससे पहले कि पता चले
हो सकता है , खुश हों वो किसी अफवाह से
हर कमज़ोर और घिनौना दिमाग
जकड लेता है जो अपनी दुर्गन्ध से इंसान को
मिल जाएगा यहाँ उसके प्रति जागरुक राग
जकड लेता है जो अपनी दुर्गन्ध से इंसान को
मिल जाएगा यहाँ उसके प्रति जागरुक राग
जागरूक कि उसमें बता सकता था वो
विक्षिप्तता या बीमारी थी या क्या थी
पर ना तो किया ना दूर करना चाहा उसको
विक्षिप्तता या बीमारी थी या क्या थी
पर ना तो किया ना दूर करना चाहा उसको
गुजर जाओ इसलिए तुम जो रो सकते हो
और उपेक्षा में सड़न को काम करने दो
जबकि रूखी हवाएँ सूखी पत्तियाँ बुहार रही हों
और उपेक्षा में सड़न को काम करने दो
जबकि रूखी हवाएँ सूखी पत्तियाँ बुहार रही हों
वतन के लिए जो उठे नहीं हाथ
वो उसके ऊंघते भाई सपने में भी
जगायें नहीं उसे भगवान के नाम के साथ
वो उसके ऊंघते भाई सपने में भी
जगायें नहीं उसे भगवान के नाम के साथ
बल्कि करने दें विश्राम शान्ति में उसे अब से
लोगों की नज़रों और जबान और उस चीज से दूर
जिसने उसको कर दिया था अलग उन सब से
लोगों की नज़रों और जबान और उस चीज से दूर
जिसने उसको कर दिया था अलग उन सब से
वो एक रचना थी गढ़ी ईश्वर के हाथ में
और जीवन जीने के पाप के लिए
वो हो गया शामिल चिंतन के अपराध में
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और जीवन जीने के पाप के लिए
वो हो गया शामिल चिंतन के अपराध में
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