एक शाश्वत दुःख से दुखी हूँ मैं
इस दुरूह आकाश के भीतर
गहराते हुये आसमान के तले
बैचेन मन को लेकर टहलता हुआ
लगातार भारी होती साँसों के साथ
गहराते हुये आसमान के तले
बैचेन मन को लेकर टहलता हुआ
लगातार भारी होती साँसों के साथ
मृतकों की भीड़ में धक्के खाते
जिस्म चल रहे हैं जीवन रुका हुआ है
और अंधेरे मुहानों पर सजी हुयी हैं पंक्तियाँ
जिस्म चल रहे हैं जीवन रुका हुआ है
और अंधेरे मुहानों पर सजी हुयी हैं पंक्तियाँ
खुद को समेट लिया है मैंने अज्ञात की परिधि में
अलग कर लेना चाहता हूँ खुद को इस जीवन से
जो हमेशा ही घिरा रहता है अनिश्चितताओं के अँधेरों में
अलग कर लेना चाहता हूँ खुद को इस जीवन से
जो हमेशा ही घिरा रहता है अनिश्चितताओं के अँधेरों में
जबकि मैं जीना चाहता हूँ
मैं नहीं नकार सकता इस विभीषिका को
जो फन फैलाये रहती है जीवन के अनमोल खजाने पर
मैं नहीं नकार सकता इस विभीषिका को
जो फन फैलाये रहती है जीवन के अनमोल खजाने पर
मिथ्या विश्वास टूट जाते हैं
आस बेकार साबित होती है
स्याह अँधेरों में कुत्ते सियार रोते हैं
और बिल्लियाँ दबे पाँव चलती हैं
आस बेकार साबित होती है
स्याह अँधेरों में कुत्ते सियार रोते हैं
और बिल्लियाँ दबे पाँव चलती हैं
हवा पानी आकाशीय बिजली
मानवीय लालच भूख वासना और आग
एक एक कर सबकुछ निगल जाती है
कभी कभी ढेर की ढेर तिनकों की तरह
मानवीय लालच भूख वासना और आग
एक एक कर सबकुछ निगल जाती है
कभी कभी ढेर की ढेर तिनकों की तरह
परछाइयाँ आती हैं
संघर्ष युद्ध और सुरक्षा के बहाने
और कभी बिना किसी बहाने भी
विनाश तांडव यातनाएँ चीखें चीत्कार
पुकार जिन्हें कोई सुनने वाला नहीं
संघर्ष युद्ध और सुरक्षा के बहाने
और कभी बिना किसी बहाने भी
विनाश तांडव यातनाएँ चीखें चीत्कार
पुकार जिन्हें कोई सुनने वाला नहीं
मेरी दाढ़ी बढ़ चुकी हैं सफ़ेद होकर
मुझे अब कोई उम्मीद बाकी नहीं रही
मैं देख चुका हूँ पूरी तरह से ईमानदार कुछ
हर तरह की भाग दौड़ अब बेवजह लगती है
मैं दुःखी हूँ भूख प्यास और अकाल से
मुझे अब कोई उम्मीद बाकी नहीं रही
मैं देख चुका हूँ पूरी तरह से ईमानदार कुछ
हर तरह की भाग दौड़ अब बेवजह लगती है
मैं दुःखी हूँ भूख प्यास और अकाल से
एक शाश्वत दुख से दुःखी हूँ मैं !
अ से
No comments:
Post a Comment