A PATHLESS TRAVELER
Nov 21, 2014
तुम बारिश सी बरसती हो ...
तुम बारिश सी बरसती हो
मैं आकाश सा भीगता हूँ
तुम नदी सी लरजती हो
मैं हवाओं सा सीजता हूँ
तुम्हारी अनवरत कलकल में
सुकून सा रमता जाता हूँ
तुम्हारी लहरों के शोर में
सागर सा खामोश हूँ मैं !...
अ से
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