Nov 2, 2014

एक दृश्य सामने से आता है ...


एक दृश्य सामने से आता है
और पृष्ठ के अंधेरे में खो जाता है
एक आवाज़ बाएँ से आती है
और दायें कान से निकल जाती है
एक आशा ऊपर से जागती है 
निरस्त हो जमीन में समा जाती है
परिदृश्य गुंथा हुआ है महीन रेशों से
परिवर्तन होता है इतना सतत
कि उसकी गति कोई गति नहीं
कि उसकी प्रतीति आधार से जुड़ी है
और अपने में स्थिर दृष्टा
रहता है नियत गतिशील
विचारों में स्वप्न में और आशाओं में !

अ से 

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