उसने कूँची चलाई ,
खिल मिल उठे सब रंग ,
साकार हुए रस रूप ,
उसने कलम उठाई ,
घुल मिल ने लगे सब शब्द ,
बहने लगे राग भाव ,
किसी ने संज्ञा उसे कवि ,
अहम् कवि सा हो गया ,
संसार कोई गुंजायमान कविता ,
किसी ने संज्ञा चितेरा
अहम् चितेरा हो गया ,
संसार एक बहता हुआ चित्र ,
अब आत्म कवि का ,
रति है ,
सुरसति है ,
सुनता है जहान ,
गढ़ता है जमीन ,
और रचता है वाक्य ,
जहन में ,
आकाश भर के !!
और अब चितेरा ,
रमा है ,
उमा है ,
देखता है दृश्य ,
रंगता है जमीन ,
ह्रदय में ,
प्रकाश भर के !!
< अ-से >
खिल मिल उठे सब रंग ,
साकार हुए रस रूप ,
उसने कलम उठाई ,
घुल मिल ने लगे सब शब्द ,
बहने लगे राग भाव ,
किसी ने संज्ञा उसे कवि ,
अहम् कवि सा हो गया ,
संसार कोई गुंजायमान कविता ,
किसी ने संज्ञा चितेरा
अहम् चितेरा हो गया ,
संसार एक बहता हुआ चित्र ,
अब आत्म कवि का ,
रति है ,
सुरसति है ,
सुनता है जहान ,
गढ़ता है जमीन ,
और रचता है वाक्य ,
जहन में ,
आकाश भर के !!
और अब चितेरा ,
रमा है ,
उमा है ,
देखता है दृश्य ,
रंगता है जमीन ,
ह्रदय में ,
प्रकाश भर के !!
< अ-से >
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