नींबू निचोड़ना भी कला है
कडवाहट नहीं आनी चाहिए
निचोड़ ही कला है
यही सभ्यता का विकास है
और रसोस्वादन
संयम और मधुरता का कार्य है
कोई अतिरिक्त प्रयास नहीं
स्वयमेव होते हुए से लय बैठाने की कला
एक चित्रकार की भाँती
जो इतने छद्म और अविरत परिवर्तनशील दृश्य पटल से
निचोड़ता है एक चित्र को , अपनी सरल दृष्टि से
घंटो एकटक देखता है मूर्तिमान होकर
और केनवास पर उतर आता है एक जीवंत रस
एक कवि की तरह
जो जानता है निचोड़ना दृश्यों से शब्दों को और शब्दों से मन को
वो उतने अँधेर तक भी जाता है जहाँ दृश्य नहीं पहुँचते
और निचोड़ लाता है ह्रदय से कुछ चुनिन्दा रसों को
जिसको जोड़कर बनाये जा सकते हैं जीवंत गहरे और सार्थक रिश्ते
शब्दों और अर्थों के बीच
एक संगीतकार की तरह
जो अनगिनत ध्वनियो के बेतरतीब सामूहिक नृत्य की भूलभुलैया में से
निचोड़ता है उस सुरीले रास्ते को
जिस पर ले जाए जा सकते हैं दो कान और एक दिल
और एक प्रेमी की तरह
जो निचोड़ लाता है
समय के अथाह भण्डार से , जीने के लिए दो पल
और भावनाओं के समुद्र से , दो नमकीन बूँदें
और उकेरता है , एक दग्ध ह्रदय की अभिव्यक्ति पर
एक मुस्कान , जो नज़र आये चहरे पर ॥
अ से
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