Apr 2, 2014

मौलिकता

चुराई जा चुकी हैं मेरी कृतियाँ , 
मेरे लिखने से पहले ही ,
उनके द्वारा जो आ टपके थे दुनिया में ,
मेरे इस जन्म से भी पहले ,

कुछ भी लिखने लगता हूँ , 
फलाना नाम बता देते हैं दर्पण ,
और बची हुयी प्रेम कविताओं का तो ,
कॉपीराइट भी ले चुके हैं वो , 

गिने चुने तत्व हैं सृष्टि के ,
और सिर्फ उतने ही शब्द संभव हैं ,
जितने वो मूल अक्षर भाव ,
पर ये भी शैलेन्द्र पहले ही कह चुके हैं ,
वो फेसबुक पर पहले आ गए थे ,
कोट्स और उद्धृत वाक्य भी नहीं छोड़े उन्होंने ,

अजीब रेस है जिसमें ,
मैं हमेशा पिछड़ जाता हूँ ,
सारी सृष्टि होती है सामने ,
पर हर वस्तु पर किसी का नाम लिखा है ,

किसी ने कहा नाम में क्या रखा है ,
इसके आगे भी उन्ही का नाम लिख दिया गया ,
यहाँ तक की मेरे नाम के आगे भी किसी का नाम है ,
आखिरी लाइन के लिए भी कुछ मौलिक नहीं बचा है !!

अ-से  

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