Apr 2, 2014

मैं पीता हूँ तुझे

अहा मय ! ओ मदिरा ! अये साक़ी !

मैं पीता हूँ तुझे 
बुझाने को 
बुझा दिए जाने को 
प्यास 
सूखा मन 
दग्ध ह्रदय

और मैं पीता हूँ 
और मैं डूब के पीता हूँ 
मैं पीना चाहता हूँ तब तक
जब तक बाकी है मेरी प्यास

और हर घूँट जलते
तेरे जहन में उतरते
हर बूँद के साथ
बढ़ जाती है मेरी प्यास

और मैं पीता हूँ तुझे
बूँद बूँद
मैं पीता हूँ तुझे
बूँद बूँद प्यास

मैं पीता हूँ थोड़ी और
थोड़ी और बढ़ने लगती है
प्यास
और मैं पीता हूँ
थोड़ी और प्यास
और मैं पीता हूँ तुझे
प्यासा बनकर
और तू पीती है मुझे प्यास बनकर !

अहा तुम ! ओ प्रिय ! अये इश्क !

अ से 

No comments: