वो डरता था उसकी हद में अपने जाने से
वो डरती थी अपनी हद में उसके आने से
और फिर ये डर जिज्ञासा बनता चला गया
वो अनुमान लगाता उसकी हदों का और फर्लांगता दीवारें
वो अनुमान लगाती अपनी हदों का और खोले रखती खिड़कियाँ
और ये अनुमान चाहत बनता चला गया
वो चाहने लगा उसको ले आये हदों के संग
वो चाहने लगी उसकी बदल जाए हदों का ढंग
और ये हदें टूटने लगी सब बेहद हो गया
सब्र की दीवारें कमज़ोर हो गयी
प्यार के सैलाब में बहने गया सब
और फिर घुलते मिलते खारापन बढ़ने लगा
बेरोकटोक आवाजाही बैचैनी का सबब थी
और फिर वो तय करने लगे अपनी हदें
और सीमित करने लगे खुद को हदों में
अब वो डरती है उसकी हद में अपने जाने से
अब वो डरता है अपनी हद में उसके आने से
अ-से
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